भारत के प्रमुख लोकनृत्य (Major folk dances of India)



लोकनृत्य / कला रूप क्षेत्र / राज्य विशेषताएँ एवं महत्व
यक्षगान कर्नाटक (विशेषकर उत्तर कन्नड़, शिमोगा, उडुपी जिले) कर्नाटक का एक पारंपरिक थिएटर रूप जो नृत्य, संगीत, अभिनय, संवाद और वेशभूषा का मिश्रण है। यह हिंदू महाकाव्यों और पुराणों की कहानियों पर आधारित होता है। इसमें वेशा (मेकअप) और अहर्य (वेशभूषा) बेहद आकर्षक होते हैं।
भांगड़ा पंजाब पंजाब का उत्सवपूर्ण लोकनृत्य, जो विशेष रूप से बैसाखी के त्योहार से जुड़ा है। यह फसल की कटाई की खुशी को दर्शाता है। ऊर्जावान कूद, चक्कर और बोलियाँ (गीत) इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं। आधुनिक समय में यह एक वैश्विक फिटनेस डांस के रूप में लोकप्रिय हुआ है।
घूमर राजस्थान राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य, विशेषकर राजपूत समुदाय द्वारा किया जाता है। महिलाएं लंबी, घेरदार स्कर्ट (घाघरा) पहनकर घूम-घूम कर नृत्य करती हैं, जो शादी-ब्याह और त्योहारों का प्रमुख आकर्षण होता है।
कालबेलिया राजस्थान राजस्थान के कालबेलिया जनजाति (सपेरा समुदाय) का पारंपरिक नृत्य। इसमें सर्प जैसी चालों और लचीलेपन पर जोर दिया जाता है। यूनेस्को द्वारा इसे 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर' घोषित किया गया है।
गरबा गुजरात नवरात्रि के त्योहार के दौरान किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य। महिलाएं एक दीपक (गरबा) के चारों ओर घेरा बनाकर ताली बजाते हुए और लयबद्ध कदमों से नृत्य करती हैं। डांडिया रास इसी का एक रूप है जिसमें छड़ियों का प्रयोग होता है।
भरतनाट्यम तमिलनाडु भारत के प्राचीन शास्त्रीय नृत्यों में से एक, जिसकी उत्पत्ति तमिलनाडु के मंदिरों में हुई। यह नृत्य, अभिनय (अभिनय) और संगीत का सुंदर समन्वय है। मुद्राएँ (हस्त संकेत) और जटिल पैर की थाप इसकी विशेषता हैं।
कथक उत्तर प्रदेश (लखनऊ, जयपुर, वृंदावन घराने) उत्तर भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य, जिसकी जड़ें मंदिर के कथावाचकों (कथक) में हैं। इसमें पैरों की तेज और जटिल थाप (तत्कार), चक्कर (चक्कर) और अभिव्यक्तिपूर्ण अभिनय प्रमुख हैं।
ओडिसी ओडिशा ओडिशा का शास्त्रीय नृत्य, जो मंदिर की मूर्तियों की मुद्राओं से प्रेरित है। त्रिभंग (शरीर को तीन स्थानों से मोड़ना) और लालित्यपूर्ण चाल इसकी पहचान है। यह मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ की कथाओं पर आधारित होता है।
बिहू असम असम का लोकप्रिय लोकनृत्य, जो बिहू त्योहार (मुख्यतः बसंत बिहू) के अवसर पर किया जाता है। युवा पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में समूह में नृत्य करते हैं, जिसमें तेज गति के कदम और ढोल (धोल), पेपा (सींग) आदि वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।
चाऊ नृत्य पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा (सरायकेला, पुरुलिया, मयूरभंज शैलियाँ) एक अर्ध-शास्त्रीय लोकनृत्य जो मुखौटों (मुखौटा) के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। यह मार्शल आर्ट से प्रभावित है और महाभारत, रामायण आदि की कहानियों को दर्शाता है।
लावणी महाराष्ट्र महाराष्ट्र का एक ऊर्जावान लोकनृत्य रूप, जिसे पारंपरिक रूप से महिला कलाकार (तमाशा कलाकार) प्रस्तुत करती हैं। इसमें तेज संगीत, जोरदार थाप और अभिव्यक्तिपूर्ण अभिनय होता है। यह प्रायः श्रृंगार रस से जुड़ा होता है।
गिद्दा पंजाब पंजाब की महिलाओं द्वारा त्योहारों और विशेष अवसरों पर किया जाने वाला समूह नृत्य। इसमें हंसमुख बोलियाँ (कविताएँ), ताली बजाना और रंगीन पोशाकें शामिल होती हैं। यह पंजाबी ग्रामीण जीवन और स्त्री सशक्तिकरण को दर्शाता है।
मोहिनीअट्टम केरल केरल का शास्त्रीय नृत्य, जिसे पारंपरिक रूप से केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। नाम का अर्थ है "मोहिनी (एक मोहक स्त्री) का नृत्य"। इसमें कोमल, लहराती हुई चालें, सफेद-सुनहरी वेशभूषा और भावपूर्ण अभिनय होता है।
डुमहाल असम (बोडो समुदाय) असम के बोडो समुदाय का पारंपरिक समूह नृत्य, जो विशेष रूप से बिहू के अवसर पर किया जाता है। पुरुषों द्वारा बड़े ढोल (खाम) बजाते हुए किया जाने वाला यह नृत्य सामुदायिक एकता का प्रतीक है।

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