वचन एवं नारे (Words and Slogans)


नारा / उद्घोष व्यक्ति / स्रोत संदर्भ एवं विवरण
करो या मरो, हे राम !
(भारत छोड़ो)
महात्मा गांधी भारत छोड़ो आंदोलन (1942) का प्रमुख नारा। 8 अगस्त, 1942 को मुंबई में ऐतिहासिक भाषण के दौरान दिया गया, जिसने जनता को अंतिम संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
इंक़लाब ज़िंदाबाद मौलाना हसरत मोहनी सर्वप्रथम 1921 में प्रयुक्त। बाद में भगत सिंह सहित क्रांतिकारियों का प्रिय नारा बना, जो पूर्ण स्वतंत्रता की माँग का प्रतीक था।
दिल्ली चलो सुभाष चंद्र बोस आज़ाद हिंद फौज (INA) के लिए 1943-44 में दिया गया नारा, दिल्ली पर कब्ज़े के संकल्प को दर्शाता है।
जय हिन्द आबिद हसन सफ़रानी आज़ाद हिंद फौज का अभिवादन। आबिद हसन द्वारा रचित और नेताजी बोस द्वारा लोकप्रिय बनाया गया, जो भारत का अनौपचारिक राष्ट्रीय नारा बन गया।
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा सुभाष चंद्र बोस 4 जुलाई, 1944 को बर्मा में आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों को संबोधित करते हुए दिया गया ओजस्वी आह्वान।
पूर्ण स्वराज्य, आराम हराम है पंडित जवाहर लाल नेहरू 1929 के लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' की घोषणा के संदर्भ में। संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान।
हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान भारतेंदु हरिश्चंद्र 19वीं सदी के भारतीय पुनर्जागरण काल में राष्ट्रीय पहचान (भाषा, संस्कृति, देश) को परिभाषित करने वाला नारा।
जय जवान ! जय किसान ! लाल बहादुर शास्त्री 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश का मनोबल बढ़ाने के लिए दिया गया नारा, सेना और किसान के योगदान को सम्मान देता है।
स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की मूलभूत माँग। तिलक ने इसे जन-जन तक पहुँचाया।
मारो फिरंगी को मंगल पांडे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बैरकपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल।
वन्दे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय उपन्यास आनंदमठ (1882) से। स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे शक्तिशाली राष्ट्रीय गीत और नारा।
वेदो की और लोटो महर्षि दयानंद सरस्वती आर्य समाज का आह्वान, जिसका उद्देश्य समाज को वैदिक मूल्यों और ज्ञान की ओर लौटने के लिए प्रेरित करना था।
साइमन कमीशन वापस जाओ लाला लाजपत राय 1928 में साइमन कमीशन (बिना भारतीय सदस्य) के विरोध में पूरे देश में उठा नारा। लाठीचार्ज के बाद लालाजी का बयान ऐतिहासिक है।
सरफ़रोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है राम प्रसाद 'बिस्मिल' बिस्मिल द्वारा लोकप्रिय यह क्रांतिकारी गीत/नारा शहादत की इच्छा को दर्शाता है और भगत सिंह से भी जुड़ा है।
सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा अल्लामा मुहम्मद इक़बाल 1904 में लिखा गया यह प्रसिद्ध गीत (तराना-ए-हिंद) देशभक्ति का अमर गीत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण नारे एवं उद्घोष
सत्यमेव जयते
(सत्य की ही विजय होती है)
मुण्डक उपनिषद
(मदन मोहन मालवीय द्वारा लोकप्रिय)
भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य, राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) के नीचे अंकित। भारतीय दर्शन और नैतिक आधार को दर्शाता है।
जय भीम डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित एवं सामाजिक न्याय आंदोलन का प्रमुख अभिवादन और नारा। अंबेडकर के विचारों और समानता के संघर्ष से जुड़ा है।
कर मत दो सरदार वल्लभभाई पटेल 1928 के बारदोली सत्याग्रह का नारा। पटेल के नेतृत्व में किसानों ने लगान न देने का सफल आंदोलन चलाया, जिसके बाद उन्हें "सरदार" की उपाधि मिली।
स्वदेशी अपनाओ बाल गंगाधर तिलक / लाला लाजपत राय / बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल) 1905 के स्वदेशी आंदोलन (बंग-भंग विरोध) का केंद्रीय नारा। विदेशी माल के बहिष्कार और भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा
श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' 1924 में लिखा गया प्रसिद्ध झंडा गीत। भारतीय तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक।
आमार सोनार बांग्ला
(मेरा सुनहरा बंगाल)
रवींद्रनाथ टैगोर 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में लिखा गया गीत। बाद में बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना। बंगाली और भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक।
जय जगत
(विश्व की जय हो)
आचार्य विनोबा भावे भूदान आंदोलन का नारा। गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित अहिंसक सामाजिक क्रांति और सर्वोदय (सबका उत्थान) का दर्शन।
अंग्रेजों भारत छोड़ो यूसुफ मेहर अली माना जाता है कि समाजवादी नेता यूसुफ मेहर अली ने 1920 के दशक में यह नारा दिया, जो 1942 के ऐतिहासिक आंदोलन का नाम बना।
"काला झंडा" प्रदर्शन
(विरोध का प्रतीक)
मोतीलाल नेहरू 1919 के रॉलेट एक्ट के विरोध में, मोतीलाल नेहरू ने अमृतसर में शोक और विरोध के प्रतीक के रूप में काला झंडा फहराया।
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल...
(सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा)
कवि प्रदीप
(गायिका: लता मंगेशकर)
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद लिखा गया और 1963 में गाया गया यह शहीदों को श्रद्धांजलि देने वाला गीत देशभक्ति गीतों में एक मील का पत्थर है।
स्वतंत्रता सेनानियों को कोटि-कोटि प्रणाम (सामूहिक स्मरण) स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रयुक्त होने वाला आम नारा।
सम्राट अशोक का चक्र (धर्मचक्र)
"धम्मो मंगलमुक्तमं" (धर्म सर्वोत्तम मंगल है)
सम्राट अशोक अशोक के धर्म स्तंभों से लिया गया। भारत के राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में स्थित अशोक चक्र न्याय और धर्म के शाश्वत प्रवाह का प्रतीक है।

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