विश्व की प्रमुख बीमारियाँ एवं रोग
| रोग/बीमारी का नाम | प्रकार / श्रेणी | कारण / रोगजनक | लक्षण एवं प्रभाव |
|---|---|---|---|
| संक्रामक रोग (Infectious Diseases) | |||
| मलेरिया | परजीवी जनित | प्लाज्मोडियम प्रजाति के परजीवी; मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। | तेज बुखार, ठंड लगकर कंपकंपी, पसीना आना, सिरदर्द, उल्टी, एनीमिया। गंभीर स्थिति में मस्तिष्क क्षति या मृत्यु। |
| टीबी (क्षय रोग) | जीवाणु जनित | माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया; हवा के माध्यम से (खाँसी/छींक) फैलता है। | लगातार खाँसी (तीन सप्ताह से अधिक), खून वाली खाँसी, छाती में दर्द, वजन घटना, रात को पसीना, बुखार। |
| हैजा | जीवाणु जनित | विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया; दूषित पानी या भोजन से फैलता है। | अचानक शुरू होने वाला तरल, पानी जैसा दस्त (धावी दस्त), उल्टी, निर्जलीकरण। तेजी से फैलने वाली महामारी। |
| इन्फ्लुएंजा (फ्लू) | विषाणु जनित | इन्फ्लूएंजा वायरस (टाइप A, B, C); हवा या संक्रमित सतहों के संपर्क से फैलता है। | अचानक बुखार, खाँसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर व मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, थकान। |
| एड्स (एचआईवी) | विषाणु जनित | ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी); संक्रमित रक्त, यौन संपर्क, माँ से बच्चे में फैलता है। | प्रारंभ में फ्लू जैसे लक्षण। लंबे समय में वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (CD4 कोशिकाओं) को नष्ट कर देता है, जिससे अवसरवादी संक्रमण (जैसे निमोनिया, कैंसर) हो जाते हैं। |
| कोविड-19 | विषाणु जनित | सार्स-कोव-2 कोरोना वायरस; हवा, संक्रमित बूंदों या सतहों के संपर्क से फैलता है। | बुखार, सूखी खाँसी, थकान, स्वाद/गंध की हानि, साँस लेने में तकलीफ। गंभीर मामलों में निमोनिया, अंग विफलता। |
| डेंगू | विषाणु जनित | डेंगू वायरस; मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। | तेज बुखार, सिरदर्द (आँखों के पीछे दर्द), जोड़ों व मांसपेशियों में तेज दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते। गंभीर रूप (हीमोरेजिक) में रक्तस्राव, प्लेटलेट्स कम होना। |
| पोलियो | विषाणु जनित | पोलियोवायरस; दूषित पानी या भोजन से फैलता है। | अधिकांश संक्रमण स्पर्शोन्मुख होते हैं। गंभीर मामलों में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न। कुछ में पक्षाघात हो जाता है, विशेष रूप से पैरों में। |
| असंक्रामक रोग (Non-Communicable Diseases - NCDs) | |||
| मधुमेह (डायबिटीज) | चयापचयी रोग |
टाइप 1: अग्न्याशय की इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं का
स्व-प्रतिरक्षित विनाश। टाइप 2: शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध और/या अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन; मोटापा, आनुवंशिकी, जीवनशैली से जुड़ा। |
बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास और भूख लगना, वजन घटना, थकान, धुंधली दृष्टि। लंबे समय में हृदय रोग, गुर्दे की विफलता, तंत्रिका क्षति, अंधापन का खतरा। |
| हृदय रोग (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) | हृदय संबंधी | हृदय को रक्त पहुँचाने वाली धमनियों (कोरोनरी आर्टरी) में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल) जमने से रुकावट। उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मोटापा, मधुमेह प्रमुख जोखिम कारक। | सीने में दर्द/जकड़न (एनजाइना), साँस फूलना, थकान। पूर्ण रुकावट से दिल का दौरा (हार्ट अटैक) हो सकता है - गंभीर सीने में दर्द, पसीना आना, चक्कर आना। |
| उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) | हृदय संबंधी | धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक होना। प्राथमिक (कारण अज्ञात, आयु/जीवनशैली से जुड़ा) और द्वितीयक (किडनी रोग, हार्मोन असंतुलन आदि के कारण) प्रकार। | अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते ("साइलेंट किलर")। कभी-कभी सिरदर्द, साँस फूलना, नकसीर। लंबे समय में हृदय रोग, स्ट्रोक, गुर्दे की विफलता का प्रमुख कारण। |
| कैंसर | नियोप्लास्टिक | कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि और विभाजन। जीन म्यूटेशन, तंबाकू, विकिरण, रसायन, कुछ वायरस (जैसे HPV, हेपेटाइटिस), आनुवंशिकता प्रमुख कारण। | असामान्य गांठ या सूजन, लगातार खाँसी, आंत की आदतों में बदलाव, अस्पष्टीकृत वजन घटना, अत्यधिक थकान, असामान्य रक्तस्राव। अंग विशेष पर निर्भर। |
| दमा (अस्थमा) | श्वसन संबंधी | श्वसन मार्ग की पुरानी सूजन, जिससे वे संकीर्ण और अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। एलर्जी (धूल, पराग), वायु प्रदूषण, व्यायाम, संक्रमण दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। | साँस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, सीटी जैसी आवाज के साथ खाँसी (व्हीजिंग)। दौरे अचानक या रात में बढ़ सकते हैं। |
| अन्य प्रमुख स्वास्थ्य स्थितियाँ | |||
| अल्जाइमर रोग | न्यूरोडीजेनेरेटिव | मस्तिष्क में प्रोटीन (अमाइलॉइड प्लाक, टॉ टेंगल्स) जमा होने से तंत्रिका कोशिकाओं का नुकसान और संचार बाधित होना। सटीक कारण अज्ञात, आयु और आनुवंशिकी प्रमुख जोखिम कारक। | याददाश्त कमजोर होना (विशेषकर हाल की घटनाएँ), भ्रम, निर्णय लेने में कठिनाई, भाषा संबंधी समस्याएँ, व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव। धीरे-धीरे बढ़ती है। |
| गठिया (आर्थराइटिस) | अस्थि-संधि रोग |
ऑस्टियोआर्थराइटिस: उम्र के साथ जोड़ों के कार्टिलेज
का घिसना। रुमेटीइड आर्थराइटिस: जोड़ों की परत पर स्व-प्रतिरक्षित हमला, जिससे सूजन होती है। |
जोड़ों में दर्द, अकड़न, सूजन, गति सीमित होना। रुमेटीइड में थकान, बुखार और वजन घटना भी हो सकती है। |
| डिप्रेशन (अवसाद) | मानसिक स्वास्थ्य | जैविक (मस्तिष्क में रसायन असंतुलन), मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों (तनाव, आघात) का संयोजन। आनुवंशिक प्रवृत्ति भी भूमिका निभाती है। | लगातार उदासी, निराशा की भावना, रुचि या आनंद का नुकसान, थकान, नींद या भूख में बदलाव, एकाग्रता में कमी, आत्महत्या के विचार। |
| ऑस्टियोपोरोसिस | अस्थि रोग | हड्डियों के घनत्व और गुणवत्ता में कमी, जिससे वे भंगुर और फ्रैक्चर के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाती हैं। उम्र, मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन कमी, कैल्शियम/विटामिन डी की कमी प्रमुख कारण। | प्रारंभिक अवस्था में अक्सर कोई लक्षण नहीं। हड्डियों (कूल्हे, रीढ़, कलाई) के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। बाद में पीठ दर्द, ऊँचाई में कमी, आसन झुकना हो सकता है। |
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