भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद - संपूर्ण सारणी
| अनुच्छेद | विषय/शीर्षक | विवरण एवं महत्व |
|---|---|---|
| 🌏 संघ और उसका राज्यक्षेत्र | ||
| अनुच्छेद 1 | भारत राज्यों का संघ | भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) कहा गया है। यह संघीय व्यवस्था की नींव है। भारत के क्षेत्र में राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और ऐसे अन्य क्षेत्रों को शामिल किया गया है जो भविष्य में अर्जित किए जा सकते हैं। |
| 📜 मौलिक अधिकार (भाग 3: अनुच्छेद 12-35) | ||
| अनुच्छेद 12-35 | मौलिक अधिकार | भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार अमेरिका से प्रेरित हैं। मूल रूप से 7 मौलिक अधिकार थे, वर्तमान में 6 हैं। संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर एक कानूनी अधिकार बना दिया गया। |
| अनुच्छेद 14 | विधि के समक्ष समता | राज्य भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। यह न्याय का आधार स्तंभ है। |
| अनुच्छेद 15 | धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध | राज्य केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर नागरिकों के प्रति विभेद नहीं करेगा। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है। |
| अनुच्छेद 16 | लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता | राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान। |
| अनुच्छेद 17 | अस्पृश्यता का अंत | अस्पृश्यता का उन्मूलन किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाता है। अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी निर्योग्यता को लागू करना अपराध होगा। |
| अनुच्छेद 18 | उपाधियों का अंत | राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा। भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। |
| अनुच्छेद 19 | वाक्-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण | 6 स्वतंत्रताएँ: वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक सम्मेलन की स्वतंत्रता, संगम या संघ बनाने की स्वतंत्रता, भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण की स्वतंत्रता, भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता, कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता। |
| अनुच्छेद 21 | प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण | किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा। न्यायालयों ने इसे "जीवन के अधिकार" के रूप में विस्तारित किया है। |
| अनुच्छेद 21A | शिक्षा का अधिकार | 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया। राज्य, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेगा। |
| अनुच्छेद 22 | कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण | गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराया जाएगा। निवारक निरोध (Preventive Detention) के मामल में विशेष प्रावधान। |
| अनुच्छेद 23 | मानव के दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध | मानव के दुर्व्यापार और बेगार तथा अन्य प्रकार के बलात् श्रम का प्रतिषेध किया जाता है। सार्वजनिक हित में अनिवार्य सेवा अपवाद है। |
| अनुच्छेद 24 | कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध | चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य जोखिम भरे रोजगार में नहीं लगाया जाएगा। |
| अनुच्छेद 25 | अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता | सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य तथा भाग 3 के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक है। |
| अनुच्छेद 29 | अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण | भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा। |
| अनुच्छेद 30 | शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार | धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा। |
| अनुच्छेद 32 | अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार | इसे "संविधान की आत्मा" कहा जाता है। मौलिक अधिकारों की प्रवर्तना के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार। सर्वोच्च न्यायालय को बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा रिट जारी करने की शक्ति। |
| 🎯 राज्य के नीति निदेशक तत्व (भाग 4) | ||
| अनुच्छेद 40 | ग्राम पंचायतों का संगठन | राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करेगा और उन्हें ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बना सकें। |
| अनुच्छेद 45 | बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध | राज्य, संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर, सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी करने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेगा। (अब अनुच्छेद 21A में स्थानांतरित) |
| 👥 मौलिक कर्तव्य | ||
| अनुच्छेद 51A | मौलिक कर्तव्य | 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। इसमें नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्य शामिल हैं जैसे संविधान का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना, देश की रक्षा करना आदि। |
| 🏛️ संघ की कार्यपालिका | ||
| अनुच्छेद 53 | संघ की कार्यपालिका शक्ति | संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह उसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा। |
| अनुच्छेद 74 | राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद | राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा। |
| अनुच्छेद 75 | मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध | प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। मंत्रीगण सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होंगे। |
| 📊 संसद | ||
| अनुच्छेद 80 | राज्य सभा की संरचना | राज्य सभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं - 238 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामित (साहित्य, कला, विज्ञान आदि के क्षेत्र में विशेष ज्ञान)। |
| अनुच्छेद 85 | संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन | राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के सदनों को सत्र के लिए आहूत करेगा। दो सत्रों के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होगा। |
| अनुच्छेद 112 | वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) | राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाएगा जिसमें उस वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्तियाँ और व्यय दर्शाए जाएंगे। |
| ⚖️ सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 124-147) | ||
| अनुच्छेद 124 | सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन | भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और अधिकतम 33 अन्य न्यायाधीश होंगे (वर्तमान संख्या 34)। |
| अनुच्छेद 126 | कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति | मुख्य न्यायाधीश के पद रिक्त होने पर या उनकी अनुपस्थिति में राष्ट्रपति किसी अन्य न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करेगा। |
| अनुच्छेद 127 | तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति | यदि सर्वोच्च न्यायालय की बैठक के लिए गणपूर्ति न हो तो मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कर सकता है। |
| अनुच्छेद 129 | सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा | सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा और उसके पास अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति होगी। |
| अनुच्छेद 131 | सर्वोच्च न्यायालय का आरंभिक क्षेत्राधिकार | केंद्र और राज्यों या राज्यों के बीच विवादों के निपटारे का अधिकार क्षेत्र। |
| अनुच्छेद 137 | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों या आदेशों का पुनरीक्षण | सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरीक्षण करने की शक्ति है। |
| अनुच्छेद 141 | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी। |
| अनुच्छेद 142 | सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और आदेशों का प्रवर्तन और खोज आदि के आदेश | सर्वोच्च न्यायालय अपने समक्ष लंबित किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है। |
| अनुच्छेद 143 | सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति | राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के किसी विधि या तथ्य के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श कर सकता है। |
| 💰 नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक | ||
| अनुच्छेद 148 | नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक | भारत का एक नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक होगा जो संघ और राज्यों के लेखाओं का संपरीक्षण करेगा। उसे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। |
| 🏛️ राज्य की कार्यपालिका | ||
| अनुच्छेद 161 | राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति | राज्यपाल को क्षमा देने और कुछ मामलों में दंड का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति है। |
| अनुच्छेद 165 | राज्य का महाधिवक्ता | प्रत्येक राज्य का एक महाधिवक्ता होगा जो राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाएगा और जो उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो। |
| 🏘️ पंचायती राज | ||
| अनुच्छेद 243 | पंचायतें | 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का गठन। 11वीं अनुसूची में 29 विषय शामिल हैं। |
| अनुच्छेद 243B | पंचायतों का गठन | प्रत्येक राज्य में ग्राम स्तर, मध्यवर्ती स्तर और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाएगा। |
| 💰 वस्तु एवं सेवा कर (GST) | ||
| अनुच्छेद 279A | वस्तु एवं सेवा कर परिषद | 101वें संविधान संशोधन (2016) द्वारा जोड़ा गया। GST परिषद का गठन किया जाएगा जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री (अध्यक्ष) और राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होंगे। GST 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ। |
| 👥 लोक सेवा आयोग | ||
| अनुच्छेद 315 | संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग | संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) होगा। |
| 🗳️ निर्वाचन | ||
| अनुच्छेद 324 | निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ | संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग में निहित है। |
| 🇮🇳 राजभाषा | ||
| अनुच्छेद 343(1) | संघ की राजभाषा | संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप अंतरराष्ट्रीय रूप होगा। |
| अनुच्छेद 350 | भाषायी अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी | प्रत्येक व्यक्ति को भाषायी अल्पसंख्यक वर्गों से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देने का अधिकार है। |
| ⚠️ आपात उपबंध | ||
| अनुच्छेद 352 | राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा | युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा की जा सकती है। 1975-77 में आंतरिक अशांति के आधार पर लगाया गया था। |
| अनुच्छेद 356 | राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने की दशा में उपबंध | राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्यथा राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाने पर कि राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो वह उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है। |
| अनुच्छेद 360 | वित्तीय आपात | राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाने पर कि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या ऋण संपन्नता को खतरा उत्पन्न हो गया है, तो वह वित्तीय आपात की उद्घोषणा कर सकता है। अभी तक कभी लागू नहीं हुआ। |
| 📝 संविधान संशोधन | ||
| अनुच्छेद 368 | संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसकी प्रक्रिया | संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। दोनों सदनों के विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) से पारित होना चाहिए। |
| ⚖️ जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा (निरस्त) | ||
| अनुच्छेद 370 | जम्मू-कश्मीर के लिए अस्थायी उपबंध | जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता था। 5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति के आदेश और संसद द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित करके इसे निरस्त कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया। |
महत्वपूर्ण तथ्य:
- मौलिक अधिकार: भाग 3 (अनुच्छेद 12-35) में, अमेरिका से प्रेरित है।
- मौलिक कर्तव्य: अनुच्छेद 51A में, 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए है।
- नीति निदेशक तत्व: भाग 4 (अनुच्छेद 36-51) में, आयरलैंड से प्रेरित है।
- संविधान की आत्मा: अनुच्छेद 32 (डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा)
- विशेष संविधान संशोधन:
- 42वाँ संशोधन (1976): "लघु संविधान"
- 44वाँ संशोधन (1978): संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटाया
- 73वाँ संशोधन (1992): पंचायती राज
- 74वाँ संशोधन (1992): नगरपालिकाएँ · 86वाँ संशोधन (2002): शिक्षा का अधिकार
- 101वाँ संशोधन (2016): GST
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